"न्याय व्यवस्था"
"न्याय व्यवस्था"
प्रेम से वंचित होते समाज में 'इश्क वाला लव' के रास्ते की बाधा सरकार भी होगी। अब तक मोहब्बत के दुश्मन हिन्दुत्त्व के ठेकेदार, जाति-मजहब, पंचायतो के नियमो से चलने वाले संगठन थे। इतिहास गवाह है कि प्यार की शुरुआत देखने से होती है। जितनी भी प्रेम आधारित प्रसिद्ध कथाये, उपन्यास है-देवदास, हीर-रांझा, लैला मजनू ये सभी इस डगर को कांटो भरा बताती है। पर यौन हिंसा के खिलाफ बनाये गए नये कानून के कुछ प्रावधानों के मुताबिक प्यार की डगर हवालात ले जाएगा। पीछा किया तो कैद, एक टक देखा तो जेल!
फिल्म (हासिल-2003 ) का ये मशहूर गीत "आँखे भी होती है दिल की जुबां, बिन बोले कर देती है हालात ये पल में बयां" । उनकी भी अपनी भाषा होती है। कौन पड़ेगा इसे ?
अब क़ानून कह रहा है कि चौदह सेकेण्ड से ज्यादा किसी लड़की को देखा तो जेल जाओगे । ध्यान रहे ! दरोगा जी आपकी आँखों के प्रहरी होंगे। चचाजान! मिर्ज़ा ग़ालिब कहते है-'उनको देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक' अब होते तो कहते उनको देखे से लगता है जेल का डर!
अगर घूर के देखने और पीछा करने का कानून अगर पहले बना होता तो , मै और मेरे दोस्त (मै अपने दोस्तों का नाम नही लूँगा वो बुरा मान जायेंगे) कितनी बार जेल की हवा खा आते। में ही क्यों सुपर स्टार शाहरुख़ खान भी जेल में चक्की पीस रहे होते। गौरी खान का पीछा जो करते थे।
पर मै इस क़ानून के ख़िलाफ नही हूँ । जिन परिस्थियों में ये कानून बना उनमे तो इससे भी सख्त कानून बनना चाहिए। लेकिन बाकी की जो धाराये है उनसे पुलिस को बेहिसाब अधिकार मिलेंगे जिनका बेजा इस्तेमाल होगा। कानून की ऐसी स्थिती पहले होती तो दुनिया की तमाम प्रेम कहानी जन्म न लेती। सोहनी-महिवाल, शीरी-फरहाद, रोमियो-जूलियट,सलीम-अनारकली। ख़ैर ! अल्लाह बचाये बेगुनाहों को क़ानून की मार से !
प्रेम से वंचित होते समाज में 'इश्क वाला लव' के रास्ते की बाधा सरकार भी होगी। अब तक मोहब्बत के दुश्मन हिन्दुत्त्व के ठेकेदार, जाति-मजहब, पंचायतो के नियमो से चलने वाले संगठन थे। इतिहास गवाह है कि प्यार की शुरुआत देखने से होती है। जितनी भी प्रेम आधारित प्रसिद्ध कथाये, उपन्यास है-देवदास, हीर-रांझा, लैला मजनू ये सभी इस डगर को कांटो भरा बताती है। पर यौन हिंसा के खिलाफ बनाये गए नये कानून के कुछ प्रावधानों के मुताबिक प्यार की डगर हवालात ले जाएगा। पीछा किया तो कैद, एक टक देखा तो जेल!
फिल्म (हासिल-2003 ) का ये मशहूर गीत "आँखे भी होती है दिल की जुबां, बिन बोले कर देती है हालात ये पल में बयां" । उनकी भी अपनी भाषा होती है। कौन पड़ेगा इसे ?
अब क़ानून कह रहा है कि चौदह सेकेण्ड से ज्यादा किसी लड़की को देखा तो जेल जाओगे । ध्यान रहे ! दरोगा जी आपकी आँखों के प्रहरी होंगे। चचाजान! मिर्ज़ा ग़ालिब कहते है-'उनको देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक' अब होते तो कहते उनको देखे से लगता है जेल का डर!
अगर घूर के देखने और पीछा करने का कानून अगर पहले बना होता तो , मै और मेरे दोस्त (मै अपने दोस्तों का नाम नही लूँगा वो बुरा मान जायेंगे) कितनी बार जेल की हवा खा आते। में ही क्यों सुपर स्टार शाहरुख़ खान भी जेल में चक्की पीस रहे होते। गौरी खान का पीछा जो करते थे।
पर मै इस क़ानून के ख़िलाफ नही हूँ । जिन परिस्थियों में ये कानून बना उनमे तो इससे भी सख्त कानून बनना चाहिए। लेकिन बाकी की जो धाराये है उनसे पुलिस को बेहिसाब अधिकार मिलेंगे जिनका बेजा इस्तेमाल होगा। कानून की ऐसी स्थिती पहले होती तो दुनिया की तमाम प्रेम कहानी जन्म न लेती। सोहनी-महिवाल, शीरी-फरहाद, रोमियो-जूलियट,सलीम-अनारकली। ख़ैर ! अल्लाह बचाये बेगुनाहों को क़ानून की मार से !

