गुरुवार, 13 जून 2013

Dost or dushman

लाख चाह लो कि न बने कोई किसी का दुश्मन, लेकिन इनसानी फितरत ही ऐसी होती है दुश्मन बन ही जाते है। कभी न कभी, कहीं न कहीं, किसी न किसी मोड़ पर आपको अपने दुश्मन मिल ही जायेंगे। कभी-कभी तो लोग दोस्त और दुश्मन में अंतर ही नही समझ पाते कि वह दोस्त है या दुश्मन। आज मेरे साथ ऐसा हादसा हुआ की मुझे शायर फराज की शायरी याद आती है "तेरे करीब आके बड़ी उलझन में हूँ, मै दोस्तों में हूँ कि मै तेरे दुश्मनों में हूँ " कुछ सनकी तो यह भी कहते है की अगर जिंदगी में कोई दुश्मन नही है  तो जीने का मजा नही है दोस्त बनाना आसान + काम है लेकिन दोस्ती निभाना कठिन काम है।
          खैर! खुदा बचाए दोस्तों को दुश्मन बनने से । में तो दोस्तों में ही इतना व्यस्त हूँ कि दुश्मनी के लिए वक्त ही नही है।...............

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